
होम लोन की ब्याज दरों को ऑप्टिमाइज़ करने, धारा 24(b) और 80C के तहत अधिकतम टैक्स बचत करने की पूरी जानकारी।
!ज़रूरी बातें
- 1धारा 24(b) के तहत ब्याज पर ₹2 लाख और धारा 80C के तहत मूलधन पर ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट का लाभ उठाएँ
- 2जॉइंट होम लोन में पति-पत्नी दोनों अलग-अलग पूरी टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं
- 3सिबिल (CIBIL) स्कोर 750+ रखने से बैंकों से कम ब्याज दर पर लोन आसानी से मिल जाता है
प्रॉपर्टी खरीदना और होम लोन लेना एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सही योजना के साथ लिया गया होम लोन केवल एक कर्ज़ नहीं है, बल्कि टैक्स बचाने और संपत्ति बनाने का बेहतरीन जरिया भी है।
1. होम लोन ब्याज पर टैक्स छूट (धारा 24b)
आयकर अधिनियम की धारा 24(b) के तहत, अपने रहने के लिए खरीदे गए मकान के होम लोन ब्याज पर हर साल ₹2,00,000 तक की टैक्स छूट मिलती है।
- लोन लेने के 5 साल के भीतर निर्माण पूरा होना आवश्यक है।
- यदि संपत्ति किराए पर दी गई है, तो सेट-ऑफ नियमों के तहत ब्याज छूट की कोई ऊपरी सीमा नहीं होती।
2. मूलधन भुगतान पर छूट (धारा 80C)
धारा 80C के तहत होम लोन के मूलधन (Principal) भुगतान पर हर वित्त वर्ष में ₹1,50,000 तक क्लेम किया जा सकता है। इसमें स्टैम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क भी शामिल हैं।
3. जॉइंट होम लोन से दोगुना टैक्स लाभ
पति-पत्नी या माता-पिता के साथ मिलकर जॉइंट होम लोन लेने से दोहरा फायदा होता है:
- दोनों सह-आवेदक ब्याज पर ₹2-2 लाख (कुल ₹4 लाख/वर्ष) तक की छूट पा सकते हैं।
- दोनों मूलधन पर ₹1.5-1.5 लाख (कुल ₹3 लाख/वर्ष) तक की छूट पा सकते हैं।
4. कम ब्याज दर पाने के अहम सुझाव
15-20 साल के लोन की EMI कम रखने के लिए:
- अपना सिबिल स्कोर 750 से ऊपर बनाए रखें।
- हर साल लोन का कुछ हिस्सा प्री-पे (Partial Prepayment) करें जिससे ब्याज 30-40% तक घट जाता है।
- रेपो रेट लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) विकल्प चुनें।
SVI Financial Advisory
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